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MONSOON DIET PLAN

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बरसात के मौसम में क्या खायें ??


बरसात का मौसमख़ुशी की लहर लेकर आता है। बारिश की फुहार, चेहरे पर पानी की बूंदे टपकना इसका आनन्द ही अलग होता है। 
खुशनुमा मौसम में खाने-पीने का मजा कुछ और ही होता है।  
अक्सर....... इसी दौरान हमारी थोड़ी सी लापरवाही से हम बीमार पड़ जाते है। थोड़ी सी सावधानी रखकर सेहत का ख्याल रखें और साथ में बारिश का भी आनन्द लेकर डाइट का पालन कर सकते है। 

मानसून डाइट प्लान-
ब्रेकफास्ट

सुबह के समय में नाश्ते में हेल्दी ब्रेकफास्ट लेने की कोशिश करें।
स्प्राउट्स, उपमा, दलिया, ओट्स और इडली लेना चाहिए। 

कॉर्नफ्लैक्स और टोस्ट भी ले सकते है।
ग्रीन टी ले सकते है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स जो सेहत के लिए बहुत अच्छे होते है। इन सभी के साथ अगर ग्रीन टी लेते हो तो आपके स्वास्थ्य के लिये और अच्छा रहेगा।

लंच

तेज मिर्च और आयल युक्त खाना खाने से बचें। 
इसके स्थान पर दो चपाती, दाल और सलाद लेवें।
तला-भुना खाना आपके शरीर के लिये ना तो पोषण का कार्य करता है और इस मौसम में तो हरगिज़ ना लें।
मिक्स आटा की चपाती को उपयोग में ले सकते है, जिससे आपको पोषण और अलग स्वाद का आनन्द मिल सकता है।
ककड़ी का रायता भी साथ में …

GOD IS EVERYWHERE !!

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भगवान हर जगह है !!
ब्रह्मांड में पृथ्वी एकमात्र ऐसी जगह है, जहाँ पर मानव, उसके इर्द-गिर्द प्रकृति का सुन्दर नज़ारा और जीव-जन्तु विचरण करते हुये आस-पास मौजूद रहते है। 

पृथ्वी ही एक जगह है, जहाँ पर जीवन है और किसी भी जगह जीवन का एक कण भी मौजूद नहीं है।
सृष्टि की रचना एक मानव जीवन से अंकुरित होते हुये, अनेक शाखा की तरह समुदाय में तब्दील होकर समाज के तौर पर पनपी। समाज में मानव ने अपने विचार, खान-पान, आदत और रहन-सहन अलग-अलग होने से एक पृथक समुदाय में रहने लगे और इस तरहबड़े-छोटे समाज बन गये ।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में रहकर अपनी सारी आवश्यकता की पूर्ति करता है- जन्म, शिक्षा, विवाह, संतान और अंतिम यात्रा यानि की मौत।

मौत जीवन का कड़वा सच है।
जीवन की अंतिम अवस्था में व्यक्ति भगवान को मानने लगता है, वह बचपन से लेकर प्रौढ़ अवस्था तक सांसारिक आनन्द के मायावी जाल में कैद होकर जीता है। अपना जीवन, परिवार, मित्र और नौकरी के साथ यूँ ही वक़्त निकाल देता है- कब बुढ़ापा ने दस्तक दी वाकई उसको पता नहीं चल पाता है, और आखिर में .....
अफ़सोस करता है- मैंने तो जीवन में कुछ भी भला काम नहीं किया, मेरा जी…

SURYA NAMSKAR

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सूर्य नमस्कार क्या है ?

प्राचीनकाल से ही सूर्य नमस्कार का उदय होकर उस समय एक ऐसा अभ्यास बन गया जो मनुष्य आध्यात्मिक शक्ति के प्रति सजग होकर अपनी आवश्यकता की पूर्ति आध्यात्मिक तौर पर करता था, उस काल में हर मनुष्य आध्यात्मिक तौर पर सचेत रहता था।  
योग को प्रथम सीढ़ी के तौर पर माना जाता था।
सूर्य नमस्कार का प्राचीन अर्थ - सूर्य की उपासना कर उससे प्राप्त करने की शक्ति।
अनेक सम्प्रदाय में कहीं ऊगते हुये सूर्य की और कहीं पर डूबते हुये सूरज की उपासना की जाती थी।
हमारे प्राचीन परम्पराओं में भी सूर्य को किसी न किसी तौर-तरीकों से उपासना करना, जिसमें सौर-प्रतीक और देवी-देवताओं की उपासना की जाती थी, जिससे प्रकृति के अंदर मौजूद शक्ति को अपने अनुकूल बना सके।

सूर्य के अनेक मन्दिर भारत में आज भी मौजूद है-

प्रसिद्ध कोणार्क मन्दिर जो उड़ीसा में है, जो आठवीं शताब्दी का है, वो मन्दिर वास्तुकला का अनोखा संगम है।

मिस्रवासियों को सूर्य के बारे में गहन जानकारी थी
सूर्य के सम्बन्ध में उनका ज्ञान एक वैज्ञानिक विधि से था
राजा के मरने पर शरीर को विशेष विधि से सुरक्षित कर रखते थे और उसका विशेष ध्यान रखा जाता था, सूर्य से …

HOW TO REMOVE FRUSTRATION ?

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निराशा को कैसे दूर करें ? जिंदगी से हर कोई, खुद की भागदौड़ से परेशान है। 
किसी को अपने काम का, बच्चों की अपनी पढ़ाई का, हर काम को टेंशन लेकर करते है, हर तरह से टेंशन में जीते है। 
नतीजा क्या होता है।
ना समय पर काम हो पाता है, ना पूरी सुकून की नींद ले पाते है, जिंदगी में हर तरफ से दबाब होने से परेशानी होने लगती है। 
धीरे-धीरे मानसिक अवसाद हो जाता है। 

जिंदगी में ना ख़ुशी और शांति रह पाती है। 

संसार की सबसे तेज गति मन की है, इसकी दुनिया इतनी विशाल है, जिसका कोई अंत नहीं, ऐसी कोई बाधा नहीं जो मन को चुनौती दे सके, मन असम्भव को सम्भव बना देती है। 
इस संसार में जितने महान व्यक्ति हुए, वो अपने मन के दसवें भाग तक ही ऊर्जा उपयोग कर पाये, सामान्य आदमी तो सिर्फ़ चार भाग तक ऊर्जा उपयोग कर पाया। शेष सारी ऊर्जा बच जाती है, वो यूँ ही बेकार चली जाती है। वो कभी काम नहीं आ पाती है। 
अक्सर हम जिंदगी अपने तरीके से जीते है, कुछ हालात में जिंदगी हमें जीने लगती है, तब पैदा होती है। 
निराशा -कहीं कोई आशा नहीं, हर तरह से खुद को कमजोर मान लेना ही निराशा है। 
आधुनिक दौर में चारों तरफ हर व्यक्ति दौड़ रहा है, उसे मालूम नहीं …

WHAT IS MANTRA YOGA ?

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मंत्र योग 

मंत्र वो शक्ति है, जो मन के आंतरिक व मानसिक विकार को दूर करती है। मंत्र जो योग का ही एक अंग है। मंत्र एक कम्पन की शक्ति है, जो मन के अंदर काफी तरह की अशुद्धियाँ को दूर करने का कार्य करती है, जहां मन का बिखराव होता है, उस को केंद्रित करती है। आंतरिक बंधन को मुक्त करने का कार्य करती है। मन कीअशुद्धियाँ
हम जो जीवन जीते है, उस दौरान मन, जीवन के कई पहलू से विचलित होता है। अधिक लालसा और हर वस्तु के प्रति आकर्षण ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है, जिससे हम अनजान बने रहते है और परिणाम होता है, जीवन के प्रति हर क्षेत्र में असंतोष पैदा होने लगता है। 
मन एक से दूसरी वस्तु के पीछे भागता है, वो प्राप्त होते ही, फिर वापस प्राप्त करने की लालसा, तुरंत उपज जाती है, ख़ुद को बहलाने की बहुत कोशिश मन करता है और अक्सर कामयाब होता है, इससे हमारे भीतर एक परेशानी का चक्र निरन्तर चलता रहता है। हमारे मन को जो भी मनोरंजन चाहिए उसको सहज ही उपलब्ध हो जाती है।  कभी-कभी मन की खुद कोई इच्छा नहीं होती, तब मन बिल्कुल स्थिर और शांत रहता है, इच्छा और लालसा की पूर्ति वो सही हो या गलत तब भी हम पूरा करते है, ये नहीं सोचते …

LIVE TO EAT OR EAT TO LIVE ???

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जीने के लिए खायें या खाने के लिए जियें !!!
भूख, जिन्दगी का वास्तविक सच है, जो ऊर्जा के खपत होने से, भोजन के द्वारा कमी महसूस होती है। शरीर में ईंधन का होना अति आवश्यक है।
स्वादिष्ठ भोजन,हर दिन, हर व्यक्ति करना चाहता है, उसकी लालसा होती है, वो न कभी बुझती है, ना ही कभी ख़त्म होती है। कोई नहीं चाहेगा, वह बिना स्वादिष्ठ भोजन के एक समय से वंचित हो जाए।
मानव स्वभाव बड़ा विचित्र होता है-

वह जो सोचता है, वह करता नहीं, जो करता वह सोचता नहीं। 

कभी जोश में  किसी स्टार या फ़िल्म को देखकर बहुत प्रेरित हो जाता है-प्रण करता है, कल से सादाभोजन करना है और फिट रहना है, चाहे कुछ भी हो जाये।
कौनसा दूर है, कल भी आ जायेगा और देखो कल भी आ गया। परिवार सहित भोजन करते समय, अच्छा और स्वादिष्ठ भोजन देखते ही वो प्रण लिया था। वो छूमंतर हो गया।
ख़ुद से फ़िर एक और झूठा वादा- सिर्फ़ आज ही खाऊंगा, कल नहीं।
वो कल............ कभी नहीं आता... 
क्यों ?? ख़ुद को नहीं मालूम ?
मैंने ऐसा कैसे कर दिया ? पछतावा होता है, जिन लोगों के सामने बड़े वादे किये थे, उनके सामने नज़र नहीं मिला पाता है।
आख़िर क्यों ?

ग़लती किसकी ?
ख़ुद को दोष देना व किसी ओर को दे…

FITNESS MISTAKE

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फिट होने में भ्रान्ति है, एक बाधा........ 
गलत खान-पान, आपके व्यायाम के साथ, जो लक्ष्य हासिल करने का ख़्वाब देखा होता है

वो अक़्सर सपनें चकनाचूर हो जाते है। व्यायाम तो करते है, लेकिन खान-पान और आदत में कभी सुधार नहीं करते है, इसलिए जो जहां से बिना सोचें समझें प्लान कर आगे बढ़ता है, थोड़े समय बाद वहीं पर खुद को पाता है।

फिटनेस को प्राप्त करने के लिये कुछ भ्रान्ति के साथ आप जीवन जीते आये हो उस से आपको बाहर आना बहुत आवश्यक है। जीवन में बदलाव होकर ही कुछ पाया जा सकता है, वो परिवर्तन आपके शरीर और मन को निरोग व स्वस्थ करता है। 

अगर आप भ्रान्ति के साथ आँख बंद करके कल के लिए बड़े परिवर्तन के प्लान के बारें में सोच रहे हो तो पहले अपने लक्ष्य के बारें में सोचें-
क्या फिटनेस गोल वाकई में बिना किसी बदलाव के संभव है ?
क्या खान-पान कैसा भी हो, लक्ष्य हासिल किया जा सकता है ?
आप लोग जो सोच रहे है, ऐसा करके फिटनेस गोल संभव है, तो लाइफ में बहुत बड़ी भूल करने जा रहे हो, इसलिए आपको कुछ भ्रान्ति से अवगत कराना चाहता हूँ। भ्रान्ति- एक वक़्त का खाना छोड़ दे तो पतले हो जाएंगे? सच- यह काफी समय से लोगों में तरीका प्रचलन …